भगवान सिंह चौहान

मसूरी: अल्पसंख्यक अधिकार दिवस (Minorities Rights Day) पर कोतवाल विद्या भूषण नेगी ने बैठक आयोजित कर अल्पसंख्यकों की समस्याओं को सुना गया व उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया. इसके साथ ही कोतवाल द्वारा मसूरी विंटरलाइन  कार्निवाल (Mussoorie Winter Line Carnival) को लेकर भी जनता से सुझाव मांगे गये व यातायात व्यवस्था को लेकर बनाये जाने वाली व्यवस्था की जानकारी दी.

अल्पसंख्यकों के साथ बैठक करते मसूरी कोतवाल विद्याभूषण नेगी 
बुधवार को मसूरी कोतवाली में अल्पसंख्यक अधिकार दिवस (Minorities Rights Day) पर आयोजित बैठक में कोतवाल विद्या भूषण ने अल्पसंख्यकों को उनके अधिकारों से अवगत कराया व उनकी सुरक्षा का भरोसा दिलाया. इस मौके पर अल्पसंख्यक समुदाय ने शहर की कई समस्याओं को सामने रखा, जिस पर कोतवाल ने समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया.

बैठक में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने कोतवाल को अवगत कराया कि मसूरी में अल्पसंख्यक समुदाय पूरी तरह सुरक्षित महसूस करता है तथा यहां आपसी भाईचारा व सांप्रदायिक सौहार्द के साथ सभी मिलजुल कर रहते हैं.

बैठक में मसूरी विंटर लाइन कार्निवाल (Mussoorie Winter Line Carnival) में यातायात व्यवस्था व जाम से होने वाली असुविधाओं के बारे में भी विस्तार से चर्चा की गई. साथ ही कार्निवाल के दौरान होने वाली समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक सुझाव भी लिए गये. विंटर लाइन कार्निवाल को लेकर यातायात व्यवस्था के लिए बनाये गये प्लान के बारे में कोतवाल नेगी ने विस्तार से बताया व कहा कि आगामी दिनों में इसका ट्रायल किया जायेगा, ताकि विंटरलाइन कार्निवाल में आने वाले पर्यटकों के साथ ही स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और वे कार्निवाल का पूरा आंनद उठा सकें.

बैठक में एसएसआई बीएल भारती, नगर पालिका सभासद दर्शन रावत, मंजूद अहमद, नफीस कुरैशी, जगजीत कुकरेजा, अवतार कुकरेजा, असलम खान, मामचंद, रोहित प्रसाद, मुकेश भटट, मौ. इस्लाम सहित बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग मौजूद रहे.

क्यों मनाया जाता है अल्पसंख्यक अधिकार दिवस (Minorities Rights Day)

18 दिसंबर को दुनिया मे अल्पसंख्यक अधिकार दिवस (Minorities Rights Day) के रूप में मनाती है. भारत में भी इसे मनाया जाता है और इस मौके पर अल्पसंख्यक आयोग, समेत तमाम संस्थाएं अलग-अलग कार्यक्रम करती हैं. यह दिन अल्पसंख्यक लोगों को आगे लाने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए मनाया जाता है. बता दें कि भारत में मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैनियों को अल्पसंख्यकों में गिना जाता है. इस मौके पर देशभर में अलग-अलग जगहों पर विभिन्न कार्यक्रम किए जाते हैं.

संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली ने 1992 में 18 दिसंबर को ही अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के लिए चुना. अल्पसंख्यक धर्म, भाषा, राष्ट्रीयता या जाति के आधार पर होते हैं. संयुक्त राष्ट्र ने तब कहा था कि देशों को अल्पसंख्यकों की संस्कृति, धर्म आदि की रक्षा करने के लिए कदम उठाने होंगे, ताकि उनका अस्तित्व खतरे में न आए.

अंतरराष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार दिवस की शुरुआत 18 दिसंबर 1992 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक घोषणा से हुई थी. भारत में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय अल्पसंख्यकों से संबंधित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है तथा अल्पसंख्यक समुदाय के हितों के लिए समग्र नीति के निर्माण, इनकी आयोजना, समन्यव, मूल्यांकन तथा नियामक रूपरेखा तथा नियामक विकास कार्यक्रमों की समीक्षा भी करता है. मंत्रालय के लक्ष्य में अल्पसंख्यकों का विकास करना शामिल है. 

भारत में अल्पसंख्यकों के विकास और संवृद्धि के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय निम्नलिखित कार्यों को सुनिश्चित कर रहा है-
1. शिक्षा का अधिकार
2. संवैधानिक अधिकार
3. आर्थिक सशक्तिकरण
4. महिलाओं का सशक्तिकरण
5. समान अवसर
6. कानून के तहत सुरक्षा और संरक्षण
7. कीमती परिसम्पत्तियों की सुरक्षा जैसे कि वक्फ़ परिसम्पतियां
8. आयोजना प्रक्रिया में सहभागिता
संयुक्त राष्ट्र द्वारा उठाया गया यह बड़ा कदम खासकर भारत के नजरिए से लिया गया था. भारत में अल्पसंख्यक आयोग इसी को ध्यान में रखते हुए बनाया गया था. यह आयोग अल्पसंख्यक लोगों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए कदम उठाता है और बहुसंख्यकों के साथ इनका समन्वय बनाने की कोशिश करता है.
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