देहरादून/मसूरी: पूर्व में मसूरी नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रहे रोहिताश शर्मा को शासन ने एक बार फिर से मसूरी में अधिशासी अधिकारी की जिम्मेदारी दे दी है, जिस पर सवाल खड़े होने लगे हैं. रोहिताश शर्मा वर्तमान में नैनीताल नगर पालिका में तैनात थे, लेकिन उनके खिलाफ वहां के सभासदों द्वारा पिछले 15 दिनों से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था, जिसके मद्देनजर शासन ने उनको वहां से हटाकर देहरादून और मसूरी दो-दो जगहों का कार्यभार दिया है, जिसको लेकर सरकार की जीरो टोलरेंस की नीति पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं.

दरअसल रोहिताश शर्मा के खिलाफ़ नैनीताल नगर पालिका के सभासदों द्वारा गत 15 दिनों से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था. सभासदों ने ईओ पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए डीएम से लेकर शासन तक शिकायत की थी, इसके बाद डीएम ने प्रकरण की जांच करते हुए ईओ से बजट खर्च करने, कर्मचारियों की संख्या और उनकी कार्यशैली के विषय में रिकार्ड तलब किया था. जिसके बाद जिलाधिकारी सविन बंसल ने शहरी विकास सचिव शैलेश बगौली को भेजी रिपोर्ट में कहा कि ईओ बिना सक्षम चिकित्सा अधिकारी का प्रमाण पत्र संलग्न कर मेडिकल लीव पर गए हैं. उन्होंने राज्य वित्त की पिछले व इस साल की प्राप्त व खर्च धनराशि का ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराया है. 

शासन ने डीएम की आख्या को आधार बनाते हुए ईओ का तबादला कर उनको नैनीताल से हटाकर दो-दो पदभार से नवाज दिया. रोहिताश शर्मा को देहरादून नगर निगम में प्रभारी उप नगर आयुक्त के साथ ही मसूरी नगर पालिका के ईओ की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दे दी गई है, जिससे अब सरकार की भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टोलरेंस की नीति पर ही सवाल खड़े हो गये हैं. सवाल इसलिए भी खड़े हो रहे है कि जिस अधिकारी पर दो दो जगह अधिशासी अधिकारी रहते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगे हो, उसे ही दो दो जगहों की जिम्मेदारी दे दी गई है. वह भी तब जब रोहिताश शर्मा के विरुद्ध मसूरी नगर पालिका में ईओ रहते हुए महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेख गायब कराने के आरोप के प्रकरण की विजिलेंस जांच अभी भी जारी है. ऐसे में जिस नगर पालिका में रोहिताश पर भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई जांच चल रही हो, फिर से उनको ही उसी नगर पालिका की जिम्मेदारी देना चोर को चौकीदार बनाने जैसा है. क्योंकि इससे उन पर चल रही जांच के प्रभावित होने के भी प्रबल आसार बन गये हैं. सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार ने अपनी जीरो टोलरेंस की निति में बदलाव कर दिया है या फिर वह मसूरी पालिका में चल रही सीबीआई जांच से जानबूझकर अनभिज्ञ बन रही है. बहरहाल जो भी हो शासन ने रोहिताश शर्मा को मसूरी नगर पालिका की जिम्मेदारी देकर विपक्ष को भी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करने का मौका दे दिया है.

काबिलेगौर है कि मसूरी नगर पालिका के महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेख गायब कराने के आरोप में तत्कालीन शहरी विकास मंत्री के निर्देश पर रोहिताश को निलंबित भी कर दिया गया था. बाद में उनको नैनीताल ईओ बनाया गया और वहां पर भी उनकी कार्य प्रणाली पर प्रश्नचिह्न् लग गया. नैनीताल पालिका में पिछले 15 दिनों से उनको हटाने की मांग को लेकर सभासदों का धरना प्रदर्शन जारी था. एक ओर शासन ने नैनीताल नगर पालिका के सभासदो को ईओ का तबादला कर राहत दे दी है. वहीं दूसरी ओर रोहिताश शर्मा को मसूरी नगर पालिका में ईओ और दून नगर निगम में प्रभारी नगर उपायुक्त की जिम्मेदारी देकर मसूरी नगर पालिका के साथ दोहरा मापदंड अपनाया है.

जनहित में जारी...................................
Share To:

Post A Comment:

0 comments so far,add yours