पौड़ी: राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के मुख्य भवन में घुसा गुलदार 40 घंटे बाद भी पकड़ में नहीं आया। इसके चलते मेडिकल की कक्षाएं नहीं चलीं। परिसर में रहने वाले स्टाफ और छात्र-छात्राएं भी गुलदार के खौफ से सहमी हुई हैं। गुलदार की यहां मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं। इसके मद्देनजर मुख्य भवन के तीन अन्य निकास द्वारों पर भी पिंजरे लगा दिए गए हैं। शूटर के साथ वन विभाग की टीम ट्रेंक्यूलाइज गन के साथ मौके पर डटी है। वन विभाग गुलदार को सुरक्षित बाहर निकालने या पिंजड़े में कैद करने की योजना बना रहा है। प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) जयराज ने भी कॉलेज का निरीक्षण कर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

बता दें रविवार सुबह 10 बजे श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग के लेक्चर हॉल की गैलरी से गुलदार मुख्य भवन में घुस गया था। यहां उसने अलग-अलग मंजिलों पर दो घंटे के अंतराल में एक क्लर्क व दो सुरक्षाकर्मियों समेत तीन कर्मचारियों पर हमला कर उन्हें जख्मी कर दिया था। इसके बाद वह गायब हो गया। तीनों का बेस अस्पताल में उपचार चल रहा है। वन विभाग की टीम, शूटर्स और पुलिस रातभर गुलदार की ताक में फार्माकोलॉजी विभाग के बाहर बैठी रही। यहां विभाग ने पिंजड़ा लगाया हुआ है। टीम को उम्मीद थी कि भूखा गुलदार कुत्ता खाने आएगा, लेकिन वह आया नहीं। भवन के अंदर उसके चलने की आवाज सुनाई दी, लेकिन वह किसी को नहीं दिखाई दिया। 

वन विभाग और पुलिस की टीम गुलदार को पकड़ने के लिए वहीं डेरा डाले हुए है। 40 घंटे गुजर जाने के बाद पकड़ में नहीं आया। सोमवार को पीसीसीएफ जयराज ने अधिकारियों के साथ घटनास्थल का निरीक्षणा किया। उन्होंने डीएफओ लक्ष्मण रावत को पिंजड़े को और अंदर रखने को कहा। साथ ही गुलदार के लिए पानी रखने और गेट को ढकने व मनुष्यों की गतिविधियां रोकने को कहा। गुलदार पानी पीने के बाद पिंजड़े में कैद कुत्ते पर हमला कर सकता है। तब वह पिंजड़े में कैद हो जाएगा। रेस्क्यू टीम की अगुआई कर रहे डीएफओ लक्ष्मण सिंह ने बताया कि गुलदार को कैमरा व फुट प्रिंट ट्रैप किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्य भवन के तीन और निकास द्वारों पर पिंजरे लगा दिए गए हैं, कुल मिलाकर मुख्य भवन में चार पिंजरे लगाए गए हैं। शिकारी जॉय हुकिल और वन विभाग की टीम गुलदार पर निगाह बनाए हुए है। रात के वक्त दरवाजे खोल दिए जाएंगे। गुलदार बाहर निकला या नहीं इसको जानने के लिए कैमरा ट्रैप और फुट प्रिंट ट्रैप किया जाएगा। इसके लिए गेटों के आगे प्लास्टर ऑफ पेरिस डाला जा रहा है। साथ ही गेटों पर कैमरे लगवाए जा रहे हैं। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज मुख्य भवन के भूतल में एक गेट पूरी तरह से बंद नहीं होता है। 

बताया गया कि देर शाम चार मंजिला मुख्य भवन की तीसरी मंजिल के कॉरिडोर में गुलदार की मौजूदगी दिखी। देर रात को इसी मंजिल पर बनी लैब में सामान गिरने की आवाजें सुनाई पड़ीं। यही नहीं, रात करीब एक बजे मुख्य प्रवेश द्वार पर लगाए गए पिंजरे में बांधे गए कुत्ते के चिल्लाने की आवाजें भी आई। वन विभाग इसे गुलदार की भीतर मौजूदगी के प्रमाण के रूप में ले रहा है। सोमवार दोपहर रेस्क्यू टीम ने मुख्य भवन से जुड़ी इमारतों को जोडऩे वाले रास्तों को भी बंद कर दिया, ताकि गुलदार इन इमारतों में न जाने पाए। सोमवार को गलती से एक कर्मचारी वहां से अंदर घुस गया। अचानक पुलिस कांस्टेबल शूरवीर सिंह चौहान की नजर उस पर पड़ी।

उन्होंने उसको तत्काल बाहर आने को कहा, जब तक वह बाहर नहीं आया। सबकी सांसें अटकी रही। क्योंकि गुलदार ने इसी स्थान के समीप तीनों कर्मचारियों पर हमला कर दिया था। मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में रात के वक्त होने वाला शोरगुल गुलदार के बाहर आने में बाधा बन रहा है। वन विभाग के अनुसार, रात में गुलदार एक बार बाहर गेट पर आया भी था, लेकिन तब तक कोई चिल्ला गया और गुलदार अंदर चला गया। रात में विभाग की टीम चार बार छात्रों को चुप कराने हॉस्टल में गई भी, लेकिन वह नहीं माने। 

श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के मुख्य भवन में भूतल सहित चार मंजिल हैं। यहां प्रत्येक विभाग गैलरी के जरिए एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। यहां हॉल, कमरे और बाथरूम भारी संख्या में हैं। ऐसे में उसको ढूंढना काफी मुश्किल है। हालांकि पीसीसीएफ जयराज इसे चुनौती के बजाय सामान्य घटना बता रहे हैं। वहीं शूटर जॉय हुकिल का कहना है कि अंदर घुसकर गुलदार को ट्रेंक्यूलाइज करना कठिन है। गुलदार को बेहोश करने में पांच मिनट लगेंगे। तब तक वह हमला कर देगा। तब गोली चलानी मजबूरी हो जाती है। बेहतर यह रहेगा कि उसको सुरक्षित बाहर निकाल दिया जाए।
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