मसूरी। टिहरी जनपद के जौनपूर क्षेत्र में यमुना की सहायक अगलाड़ नदी में ऐतिहासिक राजमौण मेला (मछली पकडने का त्यौहार) धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। आसपास के विभिन्न क्षेत्रों टिहरी जनपद के जौनपुर, देहरादून के जौनसार और उत्तरकाशी जिले के गोडर क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों ने सामुहिक रूप से मछलियां पकड़ी। एक अनुमान के मुताबिक़ इस बार लगभग एक साथ 30 से 35 कुंन्तल मछलियाँ पकड़ी गई। 

शुक्रवार को जौनपूर क्षेत्र में सदियों से मनाये जाने वाले मौण मेले में सुबह से ही ग्रामीण हाथों में कुण्डियाड़ा, फटियाड़ा, जाल व सोटा व पीठ में मछोनी लटकाए अगलाड़ नदी के मौणकोट के लिए गाजे बाजे के साथ रवाना हुए। इस बार का मौण अटठजुला क्षेत्र आठ गाँवों के लोगो के द्वारा डाला गया है। पौराणिक रीति रिवाजों और पूजा अर्चना के साथ अगलाड नदी में मौणकोट नामक जगह पर अटठजुला क्षेत्र के मेलगढ-.काॅडी तल्ली- काॅडी मल्ली- सडब तल्ला- सडब मल्ला -बेल तल्ला- बेल मल्ला व परोगी के गाॅव वालों ने सामुहिक रूप से नदी में टिमरू के छाल से पाउडर तैयार किया गया और टिमरू पाउडर का टीका लगाने के बाद पाउडर नदी में डाला गया। पाउडर पडते ही लोग नदी में कूद पडे और मछलियाॅ पकडना शुरू कर दिया। बंदरकोट, अगलाड़ पुल व यमुना मुहाने तक, जहां पर अगलाड नदी यमुना में मिलती है लोग मछलियां पकड़कर नदी से बाहर आकर अपने अपने गावों को रवाना हुए। मछली पकडने के साथ ही लोक गीत- छोडे. बाजुबंद आदि जौनपूर की लोक संस्कृति की छटा में लोग झूमते रहे है। मौण कोट से अगलाड पुल तक किसी ने मछली पकडी, तो कई लोग दर्शक के तौर पर इस कौतुहल को निहारते रहे। मौण में छोटे से बडे बुजुर्ग नदी में मछली पकडते देखे गये है।

अटठजुला के जवाहर सिह राणा ने बताया कि मौण के त्योहार का इतिहास टिहरी राजशाही से पूर्व का है। पहले मौण में ग्रामीण अपने संसाधनों के माध्यम से मछली पकडते थे। लेकिन राजशाही के समय से लोगो ने टिहरी नरेश से टिमरू काटने की अनुमति ली, जिसके बाद टिमरू की छाल से बनाये गये पाउडर की प्रथा प्रचलित हुई जो आज तक जारी है। उन्होने बताया कि इस मेले में 6 खत के लोगों को मौण बनाने की अनुमति है, जिसमें प्रतिवर्ष एक खत के लोगो को जिम्मेदारी सौपी जाती है। जिसके बाद हर वर्ष उस खत के लोगो द्वारा मौण डाला जाता है। उन्होंने बताया कि आज मौण में टिहरी जनपद के साथ ही उत्तरकाशी- देहरादून और हिमाचल से भी बडी तादात में लोगो ने शिरकत की है और मछलियाॅ पकडी है।

चकराता से आये महिशा शाह और नरेन्द्र सिह ने बताया कि अगलाड के मौण का हर किसी को बेसब्री से इंन्तजार रहता है। उनका कहना है कि मेले में जहाॅ एक दुसरों से मुलाकात हो जाती है, वही एक साथ हजारों लोगो के बीच मछली पकडने का आनन्द ही कुछ और है।

बता दें कि इस बार नदी में पानी कम होने से लोगो ने जमकर मछलियाॅ पकडी है। पिछले वर्षो की अपेक्षा इस बार तकरीबन एक साथ 30 से 35 कुंन्तल मछलियों का अनुमान लगाया जा रहा है।
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