नैनीताल: हाईकोर्ट ने मसूरी नगर पालिका की सभासद गीता कुमाई की एकल पीठ के आदेश के खिलाफ की गई विशेष अपील को खारिज कर दिया है। साथ ही मुख्य सचिव को उनके खिलाफ विधि अनुसार फैसला लेने को कहा है। 

बता दें मसूरी नगर पालिका की सभासद गीता कुमाई के खिलाफ केदार सिंह चौहान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि नगर पालिका का चुनाव 2018 में वार्ड न0 8 से जीत दर्ज करने वाली गीता कुमाई ने अपने नामांकन के समय इस आशय का शपथ पत्र दिया था कि पालिका की भूमि पर उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य का अतिक्रमण सिद्ध होने पर चुनाव जीतने की स्थित में भी वह सभासद पद से इस्तीफा दे देंगी, और पालिका/ शासन उनके विरुद्ध कार्यवाही करने को स्वतंत्र होंगे। इसके साथ ही शपथ पत्र में यह भी कहा गया था कि उनका दावा/वाद किसी भी न्यायालय में मान्य नही होगा। याचिका में यह भी कहा कि सभासद गीता कुमाई के पति भरत कुमाई पर नगर पालिका की केमल्स बैक स्थित भूमि पर कब्जा होने का मामला जांच में सामने आया है। 

केदार सिंह चौहान ने याचिका में यह भी कहा कि जांच में कब्ज़ा सिद्ध होने के बाद सभासद गीता को शपथ पत्र के मुताबिक अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए, अन्यथा उन्हें हटाया जाना चाहिए। जिस पर एकलपीठ ने केदार सिंह की याचिका पर सुनवाई के बाद मुख्य सचिव को मामले की चार सप्ताह के भीतर जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे। जिसके लिए 9 जुलाई की तिथि तय की है। इधर एकलपीठ के इस आदेश के खिलाफ सभासद गीता कुमाई ने स्पेशल अपील दायर की थी।

शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की संयुक्त खंडपीठ ने गीता कुमाई के स्पेशल अपील पर सुनवाई की। सुनवाई के बाद संयुक्त खंडपीठ ने इसे निरस्त कर दिया है। वहीं मुख्य सचिव को विधि अनुसार कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।

बता दें जिस भूमि पर सभासद के परिवार का कब्ज़ा है वह पालिका में मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक यह भूमि 1916 में मीट व वेजिटेबल मार्केट के लिए अधिग्रहित की गई थी। यह लगभग 7 बीघा भूमि है। पालिका ने इन दस्तावेजों को कलेक्ट्रेट स्थित रिकार्ड रूम से हासिल किया था।

बहरहाल, अब इस पूरे मामले में गेंद फिलहाल शासन के पाले में है और शासन को 9 जुलाई को अगली सुनवाई से पहले विधि अनुसार कार्यवाही को अमल में लाना है। 
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