सभासद पति के कब्जे वाली भूमि की पत्रावलियां मिलने से पालिकाकर्मियों में खलबली, मजबूत हुआ पालिका का दावा

मसूरी। नगर पालिका परिषद मसूरी द्बारा वर्ष 1918 में मीट व सब्जी बाजार के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि ( मसूरी नगर पालिका के सभासद पति के कब्जे वाली भूमि) की द्बितीय पत्रावली मिलने पालिका कर्मियो में भी खलबली मच गई है। इससे अब सभासद पति के खिलाफ चल रहे कब्जे के मुकदमे में पालिका मजबूती से अपना पक्ष रख सकेगी। जबकि, अब तक इस भूमि को सिर्फ मौखिक रूप से ही पालिका अपना बताती चली आ रही थी।

नगर पालिका द्वारा 1918 में मीट व सब्जी बाजार के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि  से सम्बन्धित दस्तावेजों की प्रतियां मिलने के बाद अब पालिका अपना पक्ष मजबूती के साथ अदालत में रख सकेगी। हमने इन दस्तावेजों की प्रतियों को हासिल करने के लिए बहुत प्रयास किए, जिसके बाद  इन दस्तावेजों की  प्रतियां हासिल  हो पाई हैं।


अनुज गुप्ता (अध्यक्ष)  नगर पालिका परिषद मसूरी 


सूत्रों के अनुसार कुमाँई परिवार आश्वस्त था कि पालिका ने अब तक अपने दावे के पक्ष में कोई लिखित साक्ष्य जमा नहीं किया है। इसका कारण था कि कैमल बैक स्थित इस भूमि की पत्रावलियां ही पालिका कार्यालय से गायब थीं। इसी बीच सूत्रो से ज्ञात हुआ कि अधिग्रहण की द्बितीय पत्रावली जिलाधिकारी कार्यालय मे उपलब्ध है। जिसके बाद इस सप्ताह पालिका परिषद की ओर से इस भूमि के संबंध में जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के रिकॉर्ड रूम से जानकारी मांगी थी, जिसमे पता चला कि यह जमीन डिप्टी कलेक्टर मसूरी ने वर्ष 1918 में मीट व सब्जी मार्केट के लिए अधिग्रहीत की थी। अब सम्बन्धित अवैध कब्जे वाली पालिका के स्वामित्व की भू अभिग्रहण पत्रावली मिलने से पालिका कर्मियों में भी खलबली मच गई है। 

दरअसल भरत सिंह कुमाँई के खिलाफ वर्ष 2009 से मुकदमा चल रहा है। पालिका 2009 से पीoपीoएक्ट में सभासद के पति भरत सिंह कुमाँई के विरूद्ध पालिका स्वामित्व साबित नही कर पा रही थी, वहीं नगर पालिका,मसूरी के कार्यालय में सभासद पति के अवैध कब्जे वाली भूमि की स्वामित्व पत्रावली नही मिलने से पालिका कर्मियो की अवैध कब्जाधारी के साथ साठ गाठ होने होने का अंदेशा जताया जा रहा था। 

गौरतलब है कि हाल में हुए नगर पालिका के चुनाव में गीता कुमाँई ने नामांकन में इस बात की जानकारी तो दी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि भरत सिंह कुमाँई उनके पति हैं। जबकि, परिवार के किसी भी सदस्य पर पालिका या निगम की भूमि पर कब्जा संबंधी मुकदमा चलता हुआ हो, तो उसकी उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है। ऐसे में इस मामले को लेकर सभासद गीता कुमाँई के पालिका भूमि पर अवैध कब्जा होने के कारण निर्वाचन रद्द किये जाने हेतु उच्च न्यायालय, उत्तराखंड नैनीताल मे केदार सिंह चौहान द्बारा चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने शासन को मामले की जांच कर 60 दिन के भीतर गीता कुमाँई के निर्वाचन पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। न्यायालय के आदेश पर सरकार द्बारा 60 दिन के भीतर जांच कर निर्वाचन की वैधता पर निर्णय लिया जाना है। ऐसे में ऐन पहले जिलाधिकारी कार्यालय से द्बितीय पत्रावली मिलने के कारण पालिका का अवैध कब्जा साबित करने का रास्ता साफ हो गया है। हालाँकि इस पर अब शासन को निर्णय लेना है।


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