नैनीताल: नैनीताल लोक सभा सीट से भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट ब्राह्मण समाज से आते हैं. जबकि दूसरी तरफ बसपा ने भी राजेश दुबे के रूप में एक ब्राह्मण चेहरे को मैदान में उतारा है. जो कि भट्ट के लिए परेशानी का सबब बन सकता है. बसपा सुप्रीमो मायावती रुद्रपुर में रैली कर अपने प्रत्याशी के लिए समर्थन भी मांग चुकी हैं. उन्होंने यहां दलित वर्ग को ध्यान में रखते हुए आरक्षण का मुद्दा उठाया था. दलित-ब्राह्मण का ये गठजोड़ भी अजय भट्ट के लिए नकारात्मक साबित हो सकता है. 2014 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी लईक अहमद को 59 हजार वोट मिले थे.

हालांकि, अजय भट्ट के समर्थन में पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व तमाम दूसरे बड़े नेता रैली कर चुके हैं, जबकि हरीश रावत अकेले ही बिना शीर्ष नेतृत्व के जनता के बीच जा रहे हैं, जो अजय भट्ट के पक्ष में माना जाना रहा है. इस सबके बावजूद नैनीताल सीट का इतिहास और हरीश रावत का कद अजय भट्ट के बजाय हरीश रावत की मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है.

वहीं हरीश रावत एक बड़े नेता होने के साथ जिस क्षत्रिय समाज से आते हैं, मतदाता संख्या के लिहाज से वो नैनीताल लोकसभा क्षेत्र का सबसे बड़ा वर्ग है. इस लोकसभा क्षेत्र में करीब 18 लाख वोटर हैं, इनमें करीब 18 फीसदी क्षत्रिय, करीब 15 फीसदी ब्राह्मण, 19 फीसदी अनुसूचित जाति व जनजाति, मुस्लिम व अन्य अल्पसंख्यक समेत करीब 32 फीसदी और 16 फीसदी अन्य जातियों से ताल्लुक रखने वाले मतदाता हैं.

अब लोकसभा चुनाव में उन्होंने फिर नैनीताल का रुख किया है, जहां आजादी के बाद से बीजेपी तीन बार (1991, 1998 व 2014) बार जीती है. 1957 में नैनीताल सीट पर हुए पहले चुनाव से लेकर अब तक 6 बार ही कांग्रेस के अलावा कोई पार्टी जीत पाई है. 1999 से लगातार चार बार जीत दर्ज के बाद कांग्रेस को 2014 में पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने झटका दिया था, जिन्होंने 6,36,769 वोट हासिल करते हुए कांग्रेस के करण चंद सिंह बाबा (3,52,052) को पौने तीन लाख से ज्यादा मतों से हराया था. लेकिन पार्टी ने इस बार उनका टिकट काटकर अजय भट्ट को मौका दिया है, जिनका मुकाबला पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेसी दिग्गज हरीश रावत से है और इस सीट पर पहले चरण के तहत 11 अप्रैल को मतदान होना है.
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