मसूरी: उत्तराखंड के केदारनाथ में जून 2013 में हुई त्रासदी के दौरान हुए 1509 करोड़ रूपये के घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है. इस बार मामला केन्द्रीय लोकपाल पिनाकी चंद्रघोष के पास पहुँच गया है. मसूरी निवासी अधिवक्ता व आरटीआई कार्यकर्ता राजकुमार जायसवाल ने 20 पेज के शिकायती पत्र व आपदा घोटाले से सम्बन्धित आरटीआई से प्राप्त 60 पेजों के दस्तावेजों के साथ लोकपाल के पास शिकायत भेजी गई है, जिसमे केंद्र व राज्य के 11 संस्थानों/विभागों को पक्षकार बनाया गया है. अब आपदा घोटाले के लोकपाल के दरबार में जाने के बाद एक बार फिर से प्रदेश में सियासी पारा चढने की पूरी संभावना दिखने बढ़ गई है.
 
गौरतलब है कि 2013 में उत्तराखंड के केदारनाथ में आई भीषण आपदा में लगभग 5700 लोग मारे गए थे। लोकपाल को शिकायत भेजने के बाद अधिवक्ता व आरटीआई कार्यकर्ता राजकुमार जायसवाल ने बताया कि तत्कालीन केंद्र सरकार ने जून 2013 में केदारनाथ आपदा के बाद राज्य सरकार को विशेष आयोजनगत सहायता, बाह्य सहायता कार्यक्रम, नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स और स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स के तहत नीति आयोग, वित्त और गृह मंत्रालय से कुल 6766.679 करोड़ रुपये की केंद्रीय मदद जारी की थी. जिसमें से राज्य सरकार के दस्तावेज़ में 5257.336 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब दर्ज है। उनके द्वारा आरटीआई में प्रधानमंत्री सचिवाल भारत सरकार सहित प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार के विभिन्न संस्थानों व विभागों से जानकारी मांगी व उसी के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका डाली थी, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने यह कह कर याचिका वापस कर दी कि मामले को हाईकोर्ट में दाखिल करने को कहा था. उन्होंने इस मामले की सीबीआई जांच की भी मांग की जिस पर गृहमंत्रालय ने निदेशक एवीडी पर्सनल एवं टेªनिंग को मामला भेजा. उन्हें आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक जो धनराशि केन्द्र से राज्य सरकार को मिली है, उसमें करीब 1509 करोड़ का अंतर आ रहा है. उन्होंने कहा कि केंद्र से राज्य तक आते हुए 1509 करोड़ रुपये कहां गबन किये गए, किसी को पता नहीं. उन्होंने लोकपाल को भेजी गई शिकायत में आपदा राहत राशि में बड़े पैमाने पर घोटाले का आरोप लगाया व पूरे मामले में सम्मिलित दोषियों के खिलाफ सीबीआई से जांच करवा कर कड़ी सजा देने की मांग की है. उन्होंने बताया कि इस घोटाले को दबाने में राज्य और केंद्र के कई नेताओँ, अधिकारियो की मिलीभगत साफ़ तौर पर प्रतीत होती है. जायसवाल ने घोटाले में तत्कालीन सीएम व वर्तमान में भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय बहुगुणा और पूर्व सीएम हरीश रावत के साथ ही राज्य व केंद्र के बड़े नेताओं व अधिकारियों के मिलीभगत होने की आशंका व्यक्त करते हुए कहा कि इस मामले को इसी कारण दबाने का प्रयास किया गया हैं. उन्होंने कहा कि सीएजी कैग ने भी इसमें भारी अनियमितता की बाद स्वीकार की है, इसलिए पूरे मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
 
राजकुमार जायसवाल के मुताबिक उनके द्वारा इससे पहले भी आपदा घोटाले को लेकर प्रधानमंत्री तक को शिकायत की गई थी. लेकिन कोई कार्यवाही नही हुई. उन्होंने वर्तमान सरकार द्वारा घोटालेबाजों को बचाने पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा है कि जब कोई कार्यवाही नही हुई. इसके बाद ही वे 2017 में पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले गए थे. उन्होंने उम्मीद जताई है कि उनकी शिकायत पर अब लोकपाल उच्च स्तरीय जांच करवाएंगे और घोटालेबाजों का पर्दाफाश होगा व उनको कड़ी सजा मिलेगी.
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