मसूरी: नगर पालिका परिषद मसूरी की वार्ड नं 8 की
सभासद गीता कुमाई की सभासदी पर तलवार लटकती दिख रही है। उनके खिलाफ पूर्व सभासद केदार सिंह चौहान द्वारा नैनीताल हाइकोर्ट में अतिक्रमण और निर्माण को लेकर चुनावी शपथ पत्र में तथ्यों को छिपाए जाने पर याचिका दाखिल की गई है।मामले में हाइकोर्ट ने जिला निर्वाचन अधिकारी एवं मुख्य सचिव को 60 दिन के भीतर निस्तारण के आदेश दिए हैं।


दरअसल नगर पालिका परिषद मसूरी के हाल ही में सम्पन्न हुए चुनाव में सभासद पद के लिए गीता कुमांई निवासी जिया सदन, कैमलबैक रोड, मसूरी ने नामांकन के दौरान दिए शपथ पत्र में स्वयं के नाम किसी भी तरह का अतिक्रमण और अवैध निर्माण न होने का उल्लेख किया है। साथ ही शपथ पत्र में कहा कि जो वाद न्यायालय में पीपी एक्ट में विचाराधीन है, वह भरत सिंह कुमांई के नाम चल रहा है। जबकि अधिनियम में स्पष्ट है कि यदि सदस्य व परिवार के नाम नगर पालिका स्वामित्व या प्रबंधन की भूमि, भवन, सार्वजनिक सड़क, पटरी, नाली, नाला पर अतिक्रमण है तो ऐसे में प्रत्याशी अयोग्य घोषित हो सकता है। गीता कुमाई द्वारा बड़ी सफाई से ये छुपाया गया कि भरत कुमाई उनके पति है। 

इस मामले में हाईकोर्ट ने शासन को मसूरी पूर्व सभासद केदार सिंह चौहान की याचिका पर 10 अप्रैल को 60 दिन के भीतर सुनवाई कर निस्तारण के आदेश दिए हैं। इसमें साफ उल्लेख किया गया कि यदि प्रकरण में नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 13-घ एवं 40 (ख) का उल्लंघन हुआ तो संबंधित सभासद को अपना पद गंवाना पड़ सकता है।

हालांकि मामले में सभासद गीता कुमांई का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश की उन्हें जानकारी नहीं है। उनके द्वारा जो शपथ पत्र दिया है, वह सही है।

बता दें, इससे पहले निकाय चुनाव में फर्जी दस्तावेजों से चुनाव लड़ने के देहरादून व ऋषिकेश में भी मामले सामने आए थे जिनमें दो पार्षदों को अपनी सदस्यता गवानी पड़ी है। 
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