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नई दिल्ली: बेगूसराय से चुनाव लड़ रहे जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार की तैयारियां जोरों पर हैं. बेगूसराय में उनका मुकाबला भाजपा के केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और राजद के तनवीर हसन से है. कन्हैया कुमार सीपीआई के टिकट से चुनाव लड़ रहे हैं. एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान कन्हैया कुमार ने कहा कि अगर वह चुनाव जीत कर सदन में पहुंचते हैं तो हो सकता है नरेंद्र मोदी वहां मौजूद न हों. साथ ही कहा कि कई लोग मुझसे पूछ रहे हैं कि सांसद बनने के बाद आप पहला काम क्या करेंगे. कन्हैया कुमार ने कहा कि इस देश में संसदीय परंपरा की पुनर्स्थापना करेंगे. संसदीय परंपरा का मतलब है विपक्ष का सम्मान करना. विपक्षी व्यक्तियों को हाथ जोड़ कर नमस्कार करेंगे.

ऐसा उन्होंने इस लिए कहा क्योंकि उनका मानना है कि जब पूरे देश में भाजपा विरोधी माहौल होगा तब वह जीतकर पहुंचेंगे. उन्होंने यह भी बताया के बेगूसराय में लोग कह रहे हैं कि पूरे देश में कोई जीते चाहे न जीते लेकिन बेगूसराय से कन्हैया को जिता कर पहुंचाएंगे.

यह पूछे जाने पर कि अगर आप जीत कर पहुंचते हैं और वहां पीएम मोदी ही हों तब क्या होगा? इस पर कन्हैया कुमार का कहना है कि यह बेहद शानदार मंजर होगा. कुर्ता खींचकर मोदी जी का जो हमारा सवाल पूछने का सपना है वो पूरा हो जाएगा.

कन्हैया ने आगे कहा कि जब मैं जेल से बाहर आया था तब इच्छा हुई थी कि टीवी में घुस जाऊं और उनका कुर्ता खींचकर पूछें कि मोदी जी थोड़ा हिटलर के बारे में भी बात कर लीजिए. कन्हैया का कहना है कि मैं बिना सांसद बने भी मोदी जी से मुकाबला करने के लिए तैयार हूं.

देश के नौजवानों की तरफ से मैं सवाल पूछता आया हूं और पूछता रहूंगा, और मोदी जी ने एक प्रधानमंत्री होने के नाते जो कुछ भी किया होगा उसका जवाब देना होगा. कन्हैया कुमार ने कहा कि पीएम मोदी का पाला उस तरह के नेता से नहीं पड़ा है जो उनसे सवाल पूछे. क्योंकि जब सामने से काउंटर मिलता है तो हिटलर जैसा नेता भी खुद को गोली मार लेता है. कन्हैया का कहना है कि देश के संवैधानिक मूल्यों को स्थापित करने के लिए वह चुनाव मैदान में हैं.

विचारधारा की लड़ाई
कन्हैया कुमार ने बताया कि बहुत से लोग मुझे देशद्रोही भी कहते हैं. गिरिराज सिंह विकृत मानसिकता वाला आदमी कहते हैं. तनवीर हसन मुझे 'बीजेपी की बी टीम' कहते हैं. कहने को लोग कुछ भी कहेंगे. लेकिन मेरी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से न होकर एक विचारधारा एक सोच से है. जिसके चेहरे के रूप में गिरिराज सिंह मेरे सामने हैं. तनवीर हसन मेरे प्रति सहानभूति रखते हैं. लेकिन चुनाव के कारण वह बयानबाजी कर रहे हैं.

यह पूछे जाने पर कि महागठबंधन का समर्थन नहीं मिलने से आपको नुकसान हुआ है? कन्हैया ने इसके जवाब में कहा कि जिस तरीके से संघर्षों में एक एकता बनी थी. एक गठबंधन अपने आप बना था. चुनावों में भी अगर यह एकता बनी रहती तो परिणाम बहुत अच्छे आते.

एक दो सीट पर पार्टी के बेस के आधार पर, कैंडिडेट के हिसाब से एक दो सीट निकल जाए यह बात ठीक है. लेकिन ओवरआल महागठबंधन नहीं होने से भाजपा को फायदा हुआ है. ज्यादातर देश के राज्यों में डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव लेफ्ट फोर्सेज को नुकसान हुआ है.

पोलियो ड्रॉप पिलाते थे कन्हैया
कन्हैया कुमार ने बताया कि उनके घर की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी तो उन्होंने पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ काम भी किया. जब वह स्कूल में थे तो घर-घर जाकर पोलियो ड्रॉप पिलाते थे. तब 50 रूपया मिलता था. उन्होंने बताया कि जब वह दिल्ली गए तो मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की भी नौकरी की.

उसके बाद मैने UPSC की तैयारी भी की. लेकिन सरकार की पॉलिसी से जीवन में कितना बड़ा झटका लगता है तब समझ में आया. कन्हैया ने कहा कि मैं भी CSAT का मारा हूं. कन्हैया का मानना है कि सीसैट ब्यूरोक्रेसी की डायवरर्सिटी को पूरी तरह खत्म कर देगा.
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