टिहरी गढ़वाल/मसूरी: विकास योजनाओं के नाम पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा लीपापोती और घोलमाल की खबरें अक्सर सुनने और देखने को मिलती है, लेकिन आज भी कई ऐसे जनप्रतिनिधि है जो विकास योजनाओं से गाँवों की तस्वीर बदलने की इच्छाशक्ति रखते है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया ग्राम पंचायत मोलधार की प्रधान कृष्णा देवी व सामाजिक कार्यकर्ता सोमवारी लाल नौटियाल ने जो अन्य जनप्रतिनिधियों के लिये नजीर बन गई है। साथ ही उन जनप्रतिनिधियों के लिये सीख प्रदान करती है जो सरकार की योजनाओं व धन का दुरूपयोग कर लीपापोती कर इतिश्री कर देते है।

दरअसल ग्राम पंचायत मोलधार जौनपूर विकासखंड के पालीगाड क्षेत्र में आखरी ग्राम पंचायत है। जो चारों ओर से जंगलो के बीच स्थित है। जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आखरी ग्राम पंचायत विकास कार्यो के लिहाज से काफी पिछडा था, लेकिन ग्राम प्रधान कृष्णा देवी ने सामाजिक कार्यकर्ता सोमवारी लाल नौटियाल के सहयोग से वह काम करके दिखाया, जिससे ग्राम पंचायत की तस्वीर ही बदल गई है। इन्होने मनरेगा के तहत जहा बागवानी से ग्रामीणों की बंजर भूमि हरे-भरे पेड-पौधों से आमदनी का जरिया बनता जा रहा है, वही खेतो की चकबंदी से किसानों की फसल जंगली जानवरों के नुकसान से सुरक्षित हो गई है। वहीं जिन छप्परों को गाॅव के लोग घासफूंस से बनाया करते थे, उन छप्परों पर टीन सेड बनाकर लोगों की जिंदगी सुलभ कर दी है। गाॅव से लेकर बाग-बगीचों तक ग्राम पंचायत का ऐसा कोई परिवार नही है, जिनके घरों में पानी ना हो। प्रत्येक घर के बाहर पानी का नल बहता नजर आयेगा। वहीं ग्राम पंचायत के प्रत्येक घर में बिजली का बल्ब टिमटिमाता लोगो की जिंदगी में रोशनी बिखेर रहा है, तो ग्राम पंचायत के हर छोटे बडे नदी नालों में बने पुलियों ने लोगो का आवागमन सुगम बना दिया है। इसके अलावा ग्राम पंचायत में एक बहुउद्देश्यीय गेस्ट हाउस और बरात घर बनाकर लोगो को शादी ब्याह की वह शानो शौकत प्रदान कर दी, जो शहरों को भी मात देने का मादा रखता है। वहीं स्वच्छ भारत मिशन के तहत सार्वजनिक तौर पर इस प्रकार के शौचालय का निर्माण करवाया गया है, जहाॅ पानी की भरपूर उपल्बधता के साथ गीजर आदि सुख सुविधायें भी उपलब्ध है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान की ठोस नीति और सरकारी बजट के सही इस्तेमाल से ही उनकी ग्राम पंचायत की तस्वीर बदली है। जिस कारण आज उनकी ग्राम पंचायत विकास कार्यो में अग्रणी तो है ही साथ ही अन्य के लिये नजीर भी है। वहीं ग्रामिणों का कहना है कि आज भले ही सरकार पहाडों से पलायन रोकने की बात करती है, लेकिन जब तक धरातल पर विकास सही नही होगा, तो पलायन रूकना संम्भव नही है। कृषि कार्य के लिये पहाडी क्षेत्रों में चक्कबंदी का अभाव सबसे बडा संकट है, जिसके लिये सरकार को ठोस नीति बनाकर चकबंदी का काम स्वयं अपने हाथेां में लेना होगा।

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