नई दिल्ली: भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में हजारों की संख्या में हरिद्वार से दिल्ली कूच कर रहे किसानों को दिल्ली में दाखिल होने की इजाजत नहीं दी गई है, बावजूद इसके किसान अपनी जिद पर लड़े हैं. जिसके मद्देनजर दिल्ली-यूपी बॉर्डर को सील कर दिया गया है. साथ ही बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं.

बता दें कर्जमाफी और बिजली बिल के दाम करने जैसी मांगों को लेकर किसान क्रांति पदयात्रा 23 सितंबर को हरिद्वार से आरंभ हुई थी. जिसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और मेरठ जिलों से गुजरते हुए किसान सोमवार (1 अक्टूबर) को गाजियाबाद तक पहुंच गए. जहां इन किसानों को रोक दिया गया.

इन किसानों की योजना गांधी जयंती के मौके पर राजघाट से संसद तक मार्च करने की है. लेकिन दिल्ली पुलिस की तरफ से उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी गई है. साथ ही दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर को सील कर दिया गया है. पुलिस ने बेरिगेटिंग कर दी है. यूपी पुलिस और दिल्ली पुलिस ने दिल्ली की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया गया है.

गाजियाबाद से दिल्ली में दाखिल होने वाले रास्ते को भी डाइवर्ट किया गया है. साथ ही साथ दिल्ली से कौशाम्बी और वैशाली की तरफ जाने वाले रास्ते को भी डाइवर्ट किया गया.

हरिद्वार से दिल्ली के लिए भारतीय किसान क्रांति यात्रा सोमवार को साहिबाबाद पहुंच गई. इस दौरान हजारों की संख्या में किसानों ने जीटी रोड को पूरी तरह जाम कर दिया दिल्ली के लिए कूच करने लगे.

जिलाधिकारी और एसएसपी ने करीब एक घंटे तक किसानों को समझाने की कोशिश की लेकिन किसान दिल्ली जाने पर अड़े रहे. देर रात प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों के साथ किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली से वापस लौटे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हिंडन एयर फोर्स स्टेशन पर मुलाकात की.

मुख्यमंत्री और प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब दो घंटे चली वार्ता विफल रही और प्रतिनिधिमंडल के लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की मांग पर अड़े रहे जिस पर मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्रियों से बातचीत की.

इसके बाद भाकियू का एक प्रतिनिधिमंडल गन्ना मंत्री सुरेश राणा के साथ दिल्ली के लिए रवाना हो गया. वहीं इस मामले पर जिलाधिकारी ऋतु माहेश्वरी का कहना है कि भाकियू का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली के लिए रवाना हो गया है जहां वह केंद्रीय मंत्रियों के साथ वार्ता करेगा. उन्होंने बताया कि फिलहाल जीटी रोड स्थित चार फार्म हाउसों में किसानों के रहने की व्यवस्था की गई है.


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