कुलदीप राणा, संवाददाता, रुद्रप्रयाग

जमीनों की खरीद फरोख्त की खबरें आपने पहले भी जरूर सुनी और देखी भी होगी, लेकिन इस बार मामला सरकारी जमीन पर सेंध लगाने का है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं खुरड स्थित विकास भवन के जमीन की।  स्थानीय लोगों के साथ मिलकर राजस्व उपनिरीक्षक किस तरह से नियम कायदों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, इसका बड़ा उदाहरण एक बार फिर सामने आया हैं। राजस्व विभाग द्वारा पूर्व में भी जमीनों की कईं फर्जी रजिस्ट्रीयां की गई हैं और सभी मामले जिला प्रशासन के संज्ञान में भी आए हैं, लेकिन उसके बावजूद भी राजस्व विभाग की नापाक कार्यशैली पर लगाम नहीं लग पा रहा है तो इसे क्या समझा जाना चाहिए। इस पूरी रिपोर्ट से समझिए कि आखिर कौन है इस गड़बड झाले के पीछे का मास्टरमाइंड-
जनता की सुविधा के लिए जिला मुख्यालय से चार किमी की दूरी पर स्थित खुरड़ में विकास भवन का निर्माण किया गया, जिसमें सभी सरकारी विभागों को स्थापित किया गया है। यहां पर एक जमीन को तीन बार बेचे जाने का मामला प्रकाश में आया है। पहले जमीन की रजिस्ट्री काश्तकार ने जिला विकास अधिकारी के नाम पर की, जिसके बाद इसी जमीन की रजिस्ट्ररी रमेश सिंह के नाम की गयी और अब खेत नम्बर बदलकर जमीन को कुलदीप सिंह के नाम पर रजिस्ट्री कर दी गयी है। यह सब कुछ राजस्व उप निरीक्षक की मिलीभगत से किया गया, जिसकी भनक राजस्व विभाग के उच्च अधिकारियों को सालों पहले लगने के बाद भी कोई काईवाई नहीं की गयी। 

अब जरा समझिए ये माजरा है क्या- 
मुख्य विकास भवन के सामने की जमीन और उसके आस पास में खरीद फरोख्त कायह खेल खेला जा रहा है। खेत नम्बर 94 में सौ वर्ग मीटर की जमीन को पहले 50 वर्ग मीटर जिला विकास अधिकारी के नाम पर बेचा गया। फिर वही जमीन 80 वर्ग मीटर रमेश सिंह के नाम रजिस्ट्री की गयी, अब समझ से परे यह भी है कि जमीन 100 वर्ग मीटर की थी तो 130 वर्ग मीटर की रजिस्ट्री राजस्व उप निरीक्षक ने कैसे करवा दी? इसके बाद फिर इसी खेत पर 40 वर्ग मीटर जमीन की रजिस्ट्री की जा रही है। आपको बताते चले कि विगत 12 जनवरी को राजस्व निरीक्षक ने दो अन्य राजस्व उप निरीक्षकों की मदद से जमीन का सीमांकन किया और तहसीलदार को जांच सौंपी कि रमेश सिंह की मकान के बगल में खेत संख्या 94 में 30 वर्ग मीटर और खेत नम्बर 93 में जिला विकास अधिकारी के नाम 40 वर्ग मीटर जमीन अवशेष है। इसके बाद राजस्व उप निरीक्षक की मदद से चार अप्रैल 2018 को खेत नम्बर 94 को 92 नम्बर दिखाकर तीसरी बार कुलदीप सिंह को बेचा गया, खेत नम्बर 94 पर पहले ही राजस्व उप निरीक्षक द्वारा रमेश सिंह का कब्जा दिखाकर भूमि को गैर कृषि करवाया गया। जमीन के मालिक ने राजस्व उप निरीक्षक की मदद से जमीन का नक्शा जिला विकास अधिकारी की जमीन के चित्र को दिखाया है और फर्जी तरीके से नकली नक्शा भी तैयार कर दिया। हैरत की बात तो देखिए कि इस जमीन की रजिस्ट्री खांकरा-कमोल्डी मोटर मार्ग से लगा हुआ बताया गया है, जबकि यह जमीन मुख्य विकास भवन को जाने वाले मार्ग पर पड़ती है। इन दोनों मोटर मार्गो का आपस में कोसों दूर का भी कोई कनेक्शन नहीं है। 

यह खेल अभी यहीं खत्म नहीं हुआ है। अब जरा एक और मामला समझने की कोशिश कीजिये। विकास भवन के पास ही खेत नम्बर 61 सावित्री देवी पत्नी चन्द्र सिंह ग्राम खुरड़ के नाम दर्ज थी, जो कि 480 वर्ग मीटर है। और इसमें 190 वर्ग मीटर जिला विकास अधिकारी के नाम पर है। इस भूमि को भी राजस्व उप निरीक्षक द्वारा पुनः 480 वर्ग मीटर दिखाकर अंजली देवी पत्नी दिनेश सिंह निवासी आगर के नाम रजिस्ट्री कर दी गयी। राजस्व उपनिरीक्षक बेखौफ होकर नियमों की अवहेलना कर रहे हैं और मोटी कमाई के लालच में एक ही जमीन को अलग-अलग लोगों को बेच रहे हैं। काश्तकार ओर राजस्व उपनिरीक्षकों की ठगी का शिकार हुए रमेश सिंह नेगी ने इस पूरे प्रकरण को डेढ़ साल पहले पटवारी से लेकर संज्ञान में डाल दिया था, किन्तु उल्टा चोर कोतवाल को डाटे वाली कहावात को चरितार्थ करते हुए राजस्व विभाग के अधिकारी कर्मचारी रमेश सिंह नेगी को घुमाने पर जुट गए। वर्ष 2017 में जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल के तैनाती के तीन माह बाद उनके संज्ञान में भी यह मामला लाया गया, लेकिन जिलाधिकारी भी अपने कर्मचारियों को बचाने की पूरी जदोजहद में लग गए और पूरे एक साल बाद भी कोई कार्यवाही नहीं कर पाये। मसलन अब पुनः एक जाँच कमेठी गठित गई है जो स्वीकार कर रही हैं कि सरकारी स्तर से गलती हुई है। लेकिन उधर अब भी राजस्व उपनिरीक्षक इस पूरे प्रकरण को सिरे से नकार रहे हैं।  

अब यह प्रकरण मीडिया के संज्ञान में आया तो तूल पकड़ने लगा है। भले ही जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने एक साल से इस मामले को गम्भीरता से न लिया हो, किन्तु अब वे गम्भीर नजर आ रहे हैं और जाँच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की बात भी कर रहे हैं। 

बता दें फर्जी रजिस्ट्री का यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले जखोली विकास खण्ड के एक काश्तकार पुष्कर सिंह रावत की 108 नाली भूमि राजस्व विभाग द्वारा फर्जी तरीके से रजिस्ट्री की गई थी। लेकिन 2012-13 से पीड़ित काश्तकार की जिलाधिकारी के दरबार से लेकर मुख्यमंत्री के समाधान पोर्टल और तमाम अन्य सम्बन्धित अधिकारियों और नेता के के पास जाकर एडिया घिस गई हैं बावजूद आजतक कोई समाधान नहीं निकला है। 

जहां एक ओर आए दिन मैदानी क्षेत्रों में जमीन के खरीद फरोख्त के फर्जी मामले प्रकाश में आते हैं, वहीं अब भू माफिया पहाड़ों में भी राजस्व विभाग की मिलीभगत से धड़ल्ले से जमीनों को फर्जी तरीके से खरीद-बेच रहे हैं। जिस विकास भवन में पूरे जिले के विकास की कल्याणकारी योजनाएं बनाई जाती है, उसी विकास भवन की जमीन को जिम्मेदार अधिकारियों के नाक के नीचे भू-माफियाओं द्वारा फर्जी तरीके से वारे-न्यारे किये जा रहे हैं जिससे कई लोग इनके ठगी के शिकार हो रहे हैं। रुद्रप्रयाग जनपद में फर्जी जमीन की रजिस्ट्री करने जैसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को सब कुछ पता होने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में भाजपा की जीरो टालरेंस जैसे नारों का माखौल उनका तंत्र ही उड़ा रहा है। 

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