कुलदीप राणा, संवाददाता, रुद्रप्रयाग

कहते हैं जब कुदरत इम्तिहान लेता है, तो दया और करूणा शब्द को ही भूल जाता है और चारों तरफ से मुशीबतों का ऐसा कहर ढहता है, कि इन्सान की जिन्दगी जीते जी नर्क बन बन जाती है। ऐसा ही दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्यूड़ी गाँव के एक हँसते खेलते परिवार पर। 

रुद्रप्रयाग जनपद के विकाखण्ड अगस्त्यमुनि के क्यूड़ी गाँव की पुष्पा देवी पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है कि वह गहरे सदमें में चली गई है। पहले पति और अब बेटे के लापता होने से वह बुरी तरह टूट चुकी है। ऊपर से सरकारी सिस्टम के झूठे वादे ने उसे और भी मुशीबत में डाला हुआ है।

दरअसल क्यूड़ी गांव की पुष्पा देवी अपने परिवार के साथ खुशी खुशी जीवन यापन कर रही थी, पति सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) में कार्यरत थे और दो छोटे बच्चे अंकित अनुज पढ़ाई कर रहे थे। पति अरूणाचल में तैनात थे। लेकिन कुदरत को पुष्पा देवी की ये खुशी रास नहीं आई और मुशीबतों का ऐसा जाल बुना कि वह उसमें उलझती चली गई। तीन वर्ष पूर्व नवम्बर 2016 में पुष्पा के पति गौचर से अरूणाचल के लिए निकले थे किन्तु वे रास्ते से ही गायब हो गए। काफी ढूढ़-खोज करने के बाद भी आज तक उनका कोई पता नहीं चल पाया है। एक सरकारी नौकरी में तैनात होने के बाद भी सरकारी तंत्र और पुलिस प्रशासन उनको तीन साल बाद भी कोई सुराग लगाने तक सफल नहीं हो पाये हैं। उधर घर में पुष्पा देवी के पति ने बैंक से ऋण लेकर खड़पतिया में मकान बना रखा था। पति के गायब होने के बाद पुष्पा देवी के सर पर बैंक का कर्जा चुकाने का बोझ और पति की चिंता तो थी ही ऊपर से एक और मुशीबत ने उनके दरवाजे पर दस्तक दे दी और दो वर्ष पूर्व मकान का पुस्ता भी ढह गया जिसके चलते पूरी मकान खतरे की जद में आ गई। पुष्पा देवी और उनके पिता सुरेन्द्र सिंह नेगी ने जिला प्रशासन के पास मदद की गुहार लगाई। तब तहसीलदार ने मौका मुआयना किया और कहा कि आप इस पुस्ते को बनाइये हम दैवीय आपदा या अन्य मद से पैसे दें देगे। पुष्पा देवी और उनके पिता ने रिश्तेदार और गाँव वालों से कर्ज लेकर 2 लाख 20 हजार की लागत से पुस्ते का निर्माण तो किया, लेकिन प्रशासन द्वारा उन्हें कोई मदद नहीं दी गई। ऐसे में कर्जदार रोज पुष्पा देवी के घर आते हैं और ताने मारकर चले जाते हैं। 

पति के गायब होने और कर्ज में डूबी पुष्पा देवी किसी तरह जीवन की नैय्या को धकेल ही रही थी, कि 26 जून 2018 को उनका बड़ा लड़का अंकित नेगी भी अचानक गायब हो गया। 5 दिन बीतने के बाद भी अंकित का कहीं कोई पता नहीं चल पाया है। बेटे के गायब होने के बाद से मानों पुष्पा देवी का संसार ही उजड़ गया हो। पुष्पा देवी के रो-रोकर बुरे हाल हैं पिछले पाँच दिनों से अन्न का एक दाना भी उसने मुँह में नहीं रखा। उधर अंकित के नाना नानी भी बेसुध पड़े हैं। वृद्ध नाना सुरेन्द्र सिंह पिछले चार दिनों से अंकित की ढूढ खोज में कभी पटवारी चैकी तो कभी पुलिस थाना और कभी मोहनखाल रुद्रप्रयाग के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन कई से कोई सुराग न लगने से वृद्ध आँखों में अश्रुधारा रूकने का नाम नहीं ले रही है। पहले ही इतनी मुशीबतों ने पुष्पा को घेरा हुआ था, ऊपर से बेटे अंकित के लापता होने से पुष्पा देवी की हिम्मत जवाब दे रही है। 

पुष्पा देवी के पिता सुरेन्द्र सिंह नेगी ने बताया कि अंकित जून की छुट्टियों के चलते उनके घर अपने ननिहाल बाड़व में आया हुआ था। स्कूल खुलने में कम समय रह रखा था इस वजह से 26 जून को सरेन्द्र सिंह ने अंकित को मोहन खाल से पोखरी वाली गाड़ी में बिठाया था। लेकिन देर साम तक भी वह घर नहीं पहुँचा तो पुष्पा देवी ने इसकी सूचना अपने पिता को दी। सभी सम्भावित जगहों पर टेलीफोन करने के बाद भी कहीं पता नहीं चला तो इसकी शिकायत पटवारी चैकी घिमतोली में दर्ज की गई। लेकिन घटना के चार दिन बाद भी राजस्व पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं लग पाया है। जबकि राजस्व पुलिस ने इस केश को घटना स्थल मोहनखाल होने के कारण पोखरी थाना को हस्तांतरित कर दिया है। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह भी हैं कि चार दिन से एक बच्चा गायब है और राजस्व पुलिस उसे ढूंढने की बजाय कागजों और जनपदों की सीमाओं में उलझी पड़ी है। कभी पटवारी चैकी तो कभी दूसरे जिले के थानों में फाइले घुमा रही हैं किन्तु न तो राजस्व पुलिस के हाथ कुछ लग पाया है और न ही रेंगुलर पुलिस के। पुलिस की सुस्त प्रशासन की लापरवाही तो इसी बात से लगाई जा सकती है कि तीन साल बाद भी जब अंकित के पिता को ढूंढ नहीं पाई है। अब देखना होगा कि अंकित को ढूंढने में पुलिस और जिला प्रशासन कितनी मुस्तैदी दिखती है।

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