पुष्कर सिंह नेगी, संवाददाता, चमोली
जंहा प्रदेश सरकार जीरो टॉलरेंस का दावा कर रही है, वंही घाट ब्लाक में सरकार के इस दावे पर बट्टा लगाया जा रहा है। ताजा मामला चमोली जिले के घाट ब्लॉक में मनरेगा योजना में करीब बीस लाख रुपये की अनियमितता सामने आई है। सामाजिक अंकेक्षण, जवाबदेही एवं पारदर्शिता अभिकरण की ओर से घाट ब्लॉक के गांवों में डोर टू डोर की गई मनरेगा के सोशल ऑडिट में यह बात सामने आई है। सोशल ऑडिट उत्तराखंड के अपर सचिव डा. राम विलास यादव ने मनरेगा के अधिशासी निदेशक और ग्राम्य विकास के प्रमुख सचिव को सर्वेक्षण रिपोर्ट सौपकर कार्यों की उच्च स्तरीय जांच और सम्बन्धित दोषियों से वसूली की सिफारिश की है।

घाट विकास खंड में 54 ग्राम पंचायतें हैं। सामाजिक अंकेक्षण, जवाबदेही एवं पारदर्शिता अभिकरण की ओर से चालू वर्ष के जनवरी माह में ब्लॉक के लांखी, भेंटी, बूरा, वादूक, उस्तोली, स्यांरी-बंगाली, मटई, चरबंग, मोख मल्ला और रामणी गांव में मनरेगा कार्यों का सामाजिक और भौतिक सत्यापन किया गया था, जिसमे सबसे अधिक वित्तीय अनियमितता विकासखंड घाट के लांखी गांव में मिली है। यहां मनरेगा से करीब ७६ लाख के कार्य किये गए हैं। लेकिन धरातल पर कार्य में आडिट टीम को भारी अनियमितता मिली वंही दस्तावेजों और धरातल पर हुए कार्यों में भिन्नता पाई गई है। कई कार्यों में रॉयल्टी बिल और चालान के बिना ही भुगतान किया गया है। ग्राम पंचायत उस्तोली में टीम को 18 कार्यों की फाइल गायब मिली। जिनमें 542050 रूपये के भुगतान गलत तरीके से हुए हैं।
वंही विकासखंड की कुछ ग्राम पंचायतों में बिना कार्य आदेश के धनराशि की स्वीकृति दी गई है, जो कि मनरेगा एक्ट का उल्लंघन है। अधिकांश गांवों में मजदूरों को किए गए भुगतान को जॉब कार्ड में दर्शाया नहीं गया है।

ग्राम पंचायत रामणी में मेरा गांव मेरी सड़क के कार्य पर हुए भुगतान और जमीनी कार्य और दस्तावेजो में दिखाए गए कार्य में भिन्नता पाई गई है। ऑडिट टीम ने चिन्हित गांवों में हुए मनरेगा कार्यों की उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश की है।

जिसके बाद शासन ने आडिट टीम की रिपोर्ट के बाद खण्ड विकास अधिकारी को सम्बन्धित दोषियों से सरकारी कार्यो में अनिमियता के पर कार्यवाही करने और वसूली करने के लिखित निर्देश दिए है, लेकिन शासन से 2 माह पहले आदेश आने के वावजूद भी खण्ड विकास अधिकारी दोषी कर्मचारियों से वसूली नही कर पाए है। खण्ड विकास अधिकारी मोहन चन्द्र आँचल का भी मानना है की मनरेगा कार्यो में भारी अनियमितता हुई है ,जिसमे की उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने माना की कुछ ग्राम विकास अधिकारियों की गलतियों के कारण मनरेगा कार्यो में भारी अनियमिततायें हुई है |

वंही मुख्य विकास अधिकारी चमोली हंसादत्त पाण्डेय का कहना है कि घाट ब्लॉक के गांवों में मनरेगा योजना के तहत हुए कार्यों में भारी वित्तीय अनियमित्ता का मामला मेरे संज्ञान में नही है, लेकिन अगर ऐसा मामला प्रकाश में आया है, तो संबंधित अधिकारी और प्रतिनिधि से धनराशि की वसूली की जाएगी, मामला गंभीर है, दोषियों पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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