सुनील सोनकर की खास रिपोर्ट-

मसूरी: टीवी के रियलिटी शो "वॉयस इंडिया किड्स" में अपनी आवाज से सुर्खियाँ बटोरने वाली 11 साल की नन्ही शिकायना अपने गृह नगर मसूरी पहुची, जहा पर शिकायना पली और बडी हुई। मसूरी में शिकायना को देख मसूरीवासियों ने उनका और उनके माता-पिता का जोरदार स्वागत किया। शिकायना मसूरी में आ कर भी अपने संगीत के प्रति व्यस्त् दिखी और यहा पर भी उनको गुनगुनाते हुए देखा गया। 


बता दें शिकयना टीवी के रियलिटी शो "वॉयस इंडिया किड्स" में चौथे नम्बर पर रहने के बाद शो से बाहर हो गई, परन्तु इसके बावजूद शिकायना की आवाज का जादू लोगो के सर चढ कर बोल रहा है। शो के बाद शिकायना अपने माता-पिता के साथ मसूरी पहुंची है। 

देहरादून के विकास व ङीरा मुखिया की 11 साल की बेटी शिकायना ने इस शो के टॉप-टेन में जगह बना कर खासी सुर्खियां बटोरी हैं। देहरादून के सेंट थॉमस स्कूल की क्लास 6 में पढ़ने वाली शिकायना ने इस शो में अपनी खास गायिकी से यह मुकाम हासिल किया है। इस शो में राज्य के कुछ और बच्चों ने भी हिस्सा लिया लेकिन वो पहले कुछ राउंड में ही बाहर हो गये, वहीं शिकायना अपनी गायिकी के बल पर सफलता की सीढ़ियां चढ़ती गई। शिकायना के पिता विकास खुद एक गायक हैं और बिना किसी फॉर्मल ट्रैनिंग के अपनी गायिकी को आगे बढ़ा रहे हैं। अपने पिता से ही उसे विरासत में संगीत के प्रति लगाव मिला है और कम उम्र से ही वो गीतों को गुनगुनाती आ रही है। संगीत के अलावा वो छोटी कहानियां भी लिखती हैं और अपने छोटे भाई के साथ खेलना भी उसे खासा पसंद है। शिकायना की मां देहरादून के ही कर्नल ब्राउन स्कूल में पढ़ाती हैं। 

मसूरी पहुंची शिकायना ने बताया कि जब उसने जज हिमेश रेशमिया की नकल की और जजों और लोगों ने उसे खूब पसंद किया, वो पल मुकाबले के सबसे यादगार पलों में से एक रहा। शान, हिमेश, पलक, पपॉन जैसे संगीत के दिग्गजों के सामने परफॉर्म करने के एहसास के बारे में वो कहती है कि, “थोड़ा नर्वस थी, एक्साइटेड भी। मैने ‘कैसी पहेली है ये जिदगी’ गाया और सभी जजों ने मेरी तारीफ़ की, तो काफी अच्छा लगा। उन्होने बताया कि बीच में पपाॅन सर को लेकर कुछ विवाद हुआ था, जो कि गलत था और उससे सभी लोग भी खासे मायूस थे। वही शिकायना ने बताया कि वह पूरी दुनिया घूमना चाहती है और अपने गीतो का जलवा बिखरते हुए अपने देश का नाम रोशन करना चाहती है। 

पिता-बेटी की ये जोड़ी उत्तराखंड मे ही नही देशभर में खासी पसंद की जा रही है, शिकायना के पिता बताते हैं कि, वह देश में जहाँ भी जा रहे है, सभी लोग शिकायना और उनका स्वागत कर रहे है। वही हाल ही में देहरादून की कई संस्थाओं ने शिकायना को सम्मानित किया। उन्होने कहा कि वह चाहते है कि शिकायना संगीत के साथ पढाई में भी आगे जाये और देश का नाम रोशन करे। ङीरा और विकास अपनी बेटी की अभी तक की कामयाबी से खासे खुश हैं, वो कहते हैं कि, “हमारी बेटी ने इस कड़े मुकाबले में जो मुकाम हासिल किया है, वो ही हमारे लिये किसी जीत से कम नही है।”

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