नैनीताल: उत्तराखंड में निर्वाचित निकायों का कार्यकाल तीन मई को समाप्त हो रहा है। लेकिन अभी तक निकाय चुनाव की अधिसूचना भी जारी नहीं हो पायी है, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार की संवैधानिक बाध्यता है कि चुनाव प्रक्रिया इससे पहले निपटा ली जाए। इस मामले में राज्य निर्वाचन आयोग के पत्रों का सरकार द्वारा जवाब नहीं दिए जाने पर आयोग ने हाईकोर्ट की शरण ली। जिसमे कोर्ट ने पूरे मामले में राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा था। 

सोमवार को राज्य सरकार की ओर से हलफनामे के साथ ही निकायों के परिसीमन व आरक्षण निर्धारण का समयबद्ध कार्यक्रम कोर्ट में पेश किया गया। शहरी विकास सचिव अरविंद ह्यांकी के हस्ताक्षरों से यह कार्यक्रम सौंपा गया है। आयोग के अधिवक्ता संजय भट्ट ने सरकार की ओर से जवाब दाखिल होने की पुष्टि की है।

सरकार के हलफनामे के साथ यह साफ हो गया है कि तीन मई को निकायों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार निकायों को प्रशासकों के हवाले कर देगी। प्रशासकों के कार्यकाल में ही चुनाव प्रक्रिया पूरी होगी। 12 मई को राज्य सरकार निकायों के परिसीमन व आरक्षण से संबंधित आपत्तियों का निस्तारण कर राज्य निर्वाचन आयोग से अधिसूचना प्रकाशित करने का प्रस्ताव प्राप्त करेगी, जिसके बाद ही निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। 

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